NEET की एक और छात्रा ने किया सुसाइड; री-एग्जाम में कम मार्क्स आने पर खत्म की जिंदगी, कमरे में पढ़ने के दौरान लगाई फांसी

Maharashtra NEET Girl Student Suicide Due To Gets Low Marks

Maharashtra NEET Girl Student Suicide Due To Gets Low Marks

NEET Girl Student Suicide: कोई भी परीक्षा जिंदगी से बड़ी कैसे हो सकती है. छात्र-छात्राओं को यह समझना होगा. आप किसी प्रेशर में आकर जान मत दीजिए. दरअसल अब NEET की एक और छात्रा ने सुसाइड कर लिया है. खबर महाराष्ट्र से है. जहां अहिल्यानगर के जलालपुर की रहने वाली नीट छात्रा अंकिता सांगले ने रविवार को फांसी के फंदे पर झूलकर अपनी जान दे दी. इस घटना से अंकिता के परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. वहीं सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की.

NEET री-एग्जाम में कम मार्क्स आने पर आत्महत्या

NEET एग्जाम में कम मार्क्स आने पर छात्रा अंकिता ने आत्महत्या की. अपने पीछे छोड़े सुसाइड नोट में उसने NEET का जिक्र किया है. अंकिता सांगले ने अपने घर के एक कमरे में पढ़ने के दौरान फांसी लगाई. महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अंकिता ने 21 जून को NEET की दोबारा हुई परीक्षा में 166 अंक हासिल किए थे. पुलिस ने कहा कि सुसाइड का केस दर्ज कर लिया गया है और अंकिता के शव को कब्जे में लेते हुए आगे की जांच की जा रही है और पुलिस परिवार से पूछताक्ष कर रही है.

स्ट्रेस में थी अंकिता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस पूछताक्ष में परिवार का कहना है कि NEET एग्जाम में कम मार्क्स आने पर ही अंकिता ने यह कदम उठाया है. क्योंकि अंकिता को उम्मीद के मुताबिक मार्क्स नहीं आए थे और उसे 166 मार्क्स मिले. जिसकी वजह से वह मेंटल स्ट्रेस में थी और उसने रविवार शाम 4:30 बजे फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया. परिवार के मुताबिक, अंकिता को पढ़ाई के लिए एक अलग कमरा दिया गया था और आत्महत्या करने से पहले वह उसमें बैठकर पढ़ रही थी. काफी देर बाद भी उसे कोई आवाज या हलचल नहीं सुनाई दी, तो उसके कमरे का दरवाजा खोला तो देखा कि अंकिता ने फांसी लगा ली है.

सवाल- ऐसे और कितने बच्चे मरेंगे?

नीट छात्रा अंकिता के जान के देने के बाद फिर से एक ही सवाल है कि ऐसे और कितने बच्चे मरेंगे और कब तक? जान देने का ये सिलसिला कब और कहां जाकर रुकेगा. इसके पीछे वजह क्या है. क्या सिर्फ परीक्षा में पास न हो पाना या अच्छे मार्क्स न ला पाना या फिर परिवार और समाज का प्रेशर. या क्लास कंपटीशन. यह सोच कि इसका-उसका हो गया और मेरा नहीं हो पाया. फिलहाल कई सारे सवाल हैं जो चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहे हैं और बच्चों की जान को दांव पर लगा रहे हैं. परीक्षा में सुधार के साथ-साथ इस पर ध्यान देने की उतनी ही जरुरत है.